Biography

डॉ भीमराव अम्बेडकर जीवन परिचय और जयंती Biography of Dr. Bhimrao Ambedkar

हैल्लो फ्रेंड्स आज की पोस्ट में हम डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर के बारे में जानेगे जिन्होंने हमारे देश भारत के संबिधान को बनाने में बहुत अहम योगदान दिया था. दोस्तों हम आपको ये भी बता दे की बैसे तो डॉ भीमराव अम्बेडकर जी की जीवनी काफी बड़ी है लेकिन फिर भी हम आपको अपनी इस पोस्ट में उनके के बारे में थोड़ा संछिप्त में बता देते है-

डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जिनको दुनिया में बाबासाहेव के नाम से भी जाना जाता है. बाबा साहेब उनमे से एक है. जिन्होंने भारत के समविधान को बनाने में अपना योगदान दिया था. डॉक्टर भीमराव अम्बेकर जी एक जाने माने राजनेता व् प्रख्यात विधिवेत्ता थे. जिन्होंने दलित समाज या भारतीय समाज को वर्ण व्यवस्था जैसे अंधविस्वास  से निकालकर आत्मसम्मान की राह पर लाने बाले पहले इकलौते व्यक्ति थे.बाबा साहब अम्बेडकर ने हमेशा से समाज का ध्यान उस अन्याय की तरफ किया जिसे लोग अंधविश्वास में मानते आ रहे।  बाबा साहेब ने देश में छुआ छूट,जातिवाद को मिटने के लिए बहुत से आंदोलन किये। इन्होने अपना पूरा जीवन एक तरह से गरीबो को दे दिया था.दलित व् पिछडी जाति के हक के लिए इन्होने बहुत कड़ी की थी. और आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू के कैबिनेट में पहली बार अम्बेडकर जी को लॉ मिनिस्टर बनाया गया था. अपने अच्छे काम व् देश के लिए बहुत कुछ करने के लिए अम्बेडकर जी को 1990 में देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था.

dr bheemrav ambedaker

डॉ भीमराव अम्बेडकर की जीवनी-Biography of Dr. Bhimrao Ambedkar

पूरा नाम– भीमराव राम जी अम्बेडकर

जन्म-14 अप्रैल 1891

जन्मस्थान– महू.( जिला इंदूर मध्यप्रदेश)

पिता-राम जी

माता-भीमाभाई

शिक्षा– 1915 में M.A (अर्थशास्त्र ). 1916 में कोलमियाँ विस्वविद्यालय से पी.एचडी।1921 में मास्टर  ऑफ सायन्स। 1923  में डॉक्टर ऑफ सायन्स।

विवाह– दो शादिया, पहला रमाभाई (1908) और दूसरा डॉ सविता कबीर( 1948)

डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर का जन्म मध्यप्रदेश के महू में 14 अप्रैल सन 1891  हुआ था. बाबा साहेब अपने माता पिता की 14वी संतान थे उनके पिता जी Indian  army में सूबेदार थे. 1994 में रिटारमेंट के बाद उनका पूरा परिवार महाराष्ट्र के सतारा में शिफ्ट हो गए. और कुछ ही दिनों बाद बाबा साहेब की माता का देहांत हो गया जिसके बाद उनके पता ने दूसरी शादी कर ली और बो बॉम्बे में शिफ्ट हो गए. बाबा साहेब का विवाह एक छोटी सी 9  साल की  उम्र में रमाबाई से हो गया था.

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  1. शिक्षा-Education

आपको बता दे की बाबा साहब ने अपनी शिक्षा बड़ी ही विकट परिस्थिति में पूरी की थी. जब बह स्कूल में थे तब वह एक ऐसे विद्यार्थी थे जो की अछूत थे जिनके साथ काफी भेदभाव किया जाता था।   सभी विद्यार्थी स्कूल के अंदर बैठेते थे किन्तु बाबा साहेब को बहार बैठ्या जाता था. जब कभी बालक भीमराव किसी अन्य विद्यार्थी से कुछ पूछते थे तो वह विद्यार्थी उनसे दूर भाग जाता था तब भीमराव जी ने अछूत और अस्पर्श का मतलब समझा। जिससे वे बड़े व्यथित थे. उस समय इतना ज्यादा भेदभाव था की जब भी भीमराव अम्बेडकर को प्यास लगती थी तब  ये काम चपरासी को दिया जाता था  मतलव जब भी बाबा साहेब को प्यास लगती थी तब चपरासी उन्हें दूर से एक वर्तन से पानी पिलाता था.  और जिस दिन अगर चपरासी नहीं आता था तो उस दिन उन लोगो को पानी भी नहीं मिलता था. क्योकि उस समय पानी के वर्तनो को भी नहीं छूने दिया जाता था ऐसी ही विकट परिस्थति में  बाबा साहेब ने अपनी शिक्षा पूरी की थी. स्कूल की पढ़ाई करने के बाद अम्बेडकर जी को आगे की पड़े करने के लिए बॉम्बे के एल्फिंस्टोन कॉलेज जाने का मौका मिला। बाबा साहेब पड़े में बहुत ही तेज दिमाग थे  आंबेडकर जी के शिक्षा में अव्वल प्रदर्शन के कारण उनको  बरोदा के राजा के द्वारा छात्रवृत्ति प्रदान की गई.बाबा साहेब ने राजनीती विज्ञानं व् अर्थशास्त्र में 1912 में ग्रेजुशन पूरा किया और आगे की पढ़ाई के लिए वो अमेरिका चले गए. अमेरिका के लौटने के बाद बरोदा के राजा ने उन्हें अपने राज्य का रक्षा मंत्री बना दिया। परन्तु छुआ छूत बाबा साहेब के पीछा नहीं छोड़ रही थी इतने बड़े पद पर रहते हुए भी कई बार उन्हें बहा भी निरादर का सामना करना पड़ा.

डॉ भीमराव अम्बेडकर राजनैतिक सफर

1936 में बाबा साहेब जी ने स्वतंत्र मजदूर पार्टी का गठन किया। 1937 के केंद्रीय विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 15 सीट से जीत मिली।बाबा साहेब ने अपनी सी पार्टी को आल इंडिया शीडयूल कास्ट पार्टी में बदल दिआ. और इस [पार्टी के साथ वो 1946 में सविधान के चुनाव में खड़े हुए परन्तु इस चुनाव में बहुत ही खराव प्रदर्सन रहा जिस कारण वो चुनाव हार गए.इसी बीच कांग्रेस और गाँधी जी ने अछूत लोगो को हरिजन नाम दे दिया जिससे के कारण सब लोग उन्हें हरिजन बोलने लगे.अम्बेडकर ने कांग्रेस और महात्मा गांधी के अछूत समुदाय को हरिजन कहने के फैसले पर आपत्ति जताई। अम्बेडकर जी को रक्षा सलाहकार कमिटी में रखा गया व् वाईसराय एग्जीक्विटिव कौंसिल में उन्हें लेबर का मंत्री बनाया गया और वे आजाद भारत के पहले लॉ मंत्री बने.

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संविधान का गठन

डॉ अंबेडकर को 29 अगस्त, 1947 को संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था.बाबा साहेब ने समाज के सभी वर्गों के बीच एक वास्तविक पुल के निर्माण पर जोर दिया उनके अनुसार अगर देश के अलग-अलग वर्गों के अंतर को कम नहीं किया तो देश की एकता बनाये रखना मुश्किल होगा। उन्होंने धार्मिक,लिंग,जाति  समानता पर विशेष जोर दिया। वह शिक्षा,सरकारी नौकरियों और सिविल सेवाओं में अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के लिए आरक्षण शुरू करने के लिए विधानसभा का समर्थन प्राप्त करने में सफल रहे.

डॉ भीमराव अम्बेडकर की मृत्यु

1954-1955 में बाबा साहेब जी अपने स्वस्थ्य से काफी परेशांन थे.अम्बेडकर जी  मधुमेह और कमजोर दृष्टि सहित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे जिसके चलते 6 दिसंबर 1956 को उन्होंने अपने घर दिल्ली में अंतिम साँस ली चूंकि अंबेडकर ने अपना धर्म बौद्ध धर्म को अपनाया था,  इसलिए उनका बौद्ध शैली से अंतिम संस्कार किया गया

डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती

बाबा साहेब के अच्छे कामो की वजह से उनके जन्मदिन 14  अम्बेडकर जयंती के रूप में मनाया जाने लगा जो आज भी पूरे भारत में मनाया जाता है.इस दिन सभी सरकारी स्कूल कॉलेज, में अवकाश रहता है.उनकी मुर्तिया कई देश के कई हिस्सों उनके सम्मान के लिए बनाई गयी है।  अम्बेडकर जयंती पर पूरा देश उन्हें सत-सत नमन करता है.

डॉ भीमराव अम्बेडकर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  1. भीमराव के पास 32 डिग्री थी.भीमराव  विदेश में जाकर पी.एचडी करने बाले पहले भारतीय थे.
  2. बी.आर अम्बेडकर पेशे से वकील थे. वो 2 साल तक मुंबई के सरकारी लॉ कालेज में प्रिंसिपल भी बने.
  3. झंडे में अशोक चक्र लगबाने बाले डॉ भीमराव अम्बेडकर ही थे.
  4.  आज जो फैक्ट्रीयो में 8 घंटे काम होता है. ये सब भीम जी की ही दें है इससे पहले 12 से 14 घंटे काम करना पड़ता था.
  5. डॉ भीमराव अम्बेडकर महार जाति के थे जिसे अछूत माना जाता था.
  6. डॉ भीमराव अम्बेडकर ने 1956 में अपना धर्म बदलकर बौद्ध धर्म अपना लिया था जिसके कारण उनके साथ लाखो दलितों ने ऐसा किया।
  7. डॉ. अम्बेडकर का मूल या ओरिजिनल नाम था अम्बावाडेकर था। लेकिन उनके शिक्षक, महादेव अम्बेडकर, जो उन्हें बहुत मानते थे, ने स्कूल रिकार्ड्स में उनका नाम अम्बावाडेकर से अम्बेडकर कर दिया।
  8. बाबासाहेब को किताबें पढने का बड़ा शौक था. माना जाता है कि उनकी पर्सनल लाइब्रेरी दुनिया की सबसे बड़ी व्यक्तिगत लाइब्रेरी थी, जिसमे 50 हज़ार से अधिक पुस्तकें थीं

डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के प्रसिद्ध कथन

  • एक महान आदमी एक प्रतिष्ठ आदमी से इस तरह से अलग होता है की वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है.
  • एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना पर्याप्त नहीं है. जिसकी आवस्यकता है वो है न्याय एवं रानैतिक और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था।
  • इतिहास  बताता  है  कि  जहाँ  नैतिकता  और  अर्थशाश्त्र   के  बीच  संघर्ष  होता  है  वहां  जीत  हमेशा  अर्थशाश्त्र   की  होती  है . निहित  स्वार्थों   को  तब  तक  स्वेच्छा  से  नहीं  छोड़ा   गया  है  जब  तक  कि  मजबूर  करने  के  लिए  पर्याप्त  बल  ना  लगाया  गया  हो
  • मै ऐसे धर्म को मंटा हूँ जो स्वतंत्र। और समानता और भाई चारे को सिखाये
  • क़ानून  और  व्यवस्था  राजनीतिक  शरीर  की  दवा  है  और  जब  राजनीतिक  शरीर  बीमार  पड़े  तो  दवा  ज़रूर  दी  जानी  चाहिए .
  • मनुस्य नस्वर है उसी तरह विचार नस्वर है. एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत होती है. जैसे की एक पौधे को पानी की. नहीं तो दोनों मुरझाकर मर जाते है.
  • पति और पत्नी का रिश्ता घनिष्ठ मित्रो की तरह सामान होना चाहिए।
  • मै किसी समुद्ये की प्रगति महिलाओं ने जो प्रगति हासिल की है उसे मापता हूँ.
  • कानून और व्यवस्था राजनैतिक शरीर की दवा है. और जब राजनैतिक शरीर बीमार पड़े तो दवा जरूर दी जनि चाहिए।
  • जीवन  लम्बा  होने  की  बजाये  महान  होना  चाहिए

तो दोस्तों ये थी हमारे पास कुछ डॉ भीमराव अम्बेडकर जीवन के बारे में जानकारी अगर आपके पास भी  डॉ भीमराव अम्बेडकर से जुडी कोई भी जानकारी है तो उसे हमारे साथ जरूर शेयर करे. और अगर आपको हमारी इस पोस्ट में कोई भी डॉ भीमराव अम्बेडकर के बारे  जानकारी गकत लगी हो तो हमे कमेंट करके जरूर बताये। और हा अगर आपको हमारी जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करे.

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mukesh chandra

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