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छठ पूजा क्यों और कैसे मनायी जाती है- why Chhath Puja celebrates in hindi

भारत एक एक ऐसा देश है जहां सभी पर्वो को बहुत हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. हिन्दू धर्म ऐसे कई पर्व है जिनमे सिर्फ ही नहीं बल्कि और अन्य कथाये भी जुडी है.जो कुछ न कुछ ज्ञानवर्धक सन्देश देती है.इन्ही पर्वो में से एक है,  छठ पूजा के और भी कई नाम हैं जैसे – छठ पर्व , डाला छठ, सूर्य षष्टी आदि.छठ पूजा विहार,नेपाल,उत्तरप्रदेश ,जैसे कुछ क्षेत्रों में मनाये जाने बाला एक प्रमुख त्यौहार है. बैसे हिन्दुओ के सबसे बड़े पर्व दीपावली को पर्वो की माला माना जाता है.परन्तु दीपावली पांच दिनों तक चलने बाला ये पर्व सिर्फ भैयादूज तक ही सिमित नहीं है.बल्कि दीपावली का पर्व छठ पूजा तक  है. जो पूरे भारत में बड़े धूम धाम से मनाया जाता है.छठ पूजा एक पर्व ही नहीं बल्कि महापर्व है. क्योकि ये 4 दिनों तक चलता है. छठ पूजा का त्यौहार हिन्दू कैलेंडर महीने के कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी को मनाया जाता है.  यह त्यौहार विशेष रूप से भगवान सूर्य को समर्पित होता है. छठ पूजा ४ दिवसीय व्रत के रूप में मनाया जाता है.जिसकी शुरुआत चतुर्थी को होती है. चुकिं मुख्य रूप से यह षष्ठी को मनाया जाता है इसलिय इस त्यौहार को छठ के नाम से जाना जाता है. परन्तु क्या आप जानते है. की छठ पूजा के त्यौहार की शुरुआत कब और कैसे हुई थी.अन्य त्योहारों की तरह छठ पूजा के त्यौहार के पीछे भी कई कहानियां जुडी हुई है. जिसके बारे  में हम आपको आज अपनी इस पोस्ट में बताएंगे तो आइये जानते

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छठ पूजा क्यों मानायी जाती है

छठ पूजा मनाये  पीछे कई कहानियाँ प्रचलित है, जिसके बारे में  विस्तार जानेंगे

महाभारत  जुडी है छठ पूजा

सूर्य की होती है आराधना

एक पौराणिक कथा के अनुसार छठ पूजा मनाने  शुरुआत महाभारत काल से हुई थी.इस कथा के अनुसार अंगराज कर्ण सूर्य पुत्र होने के साथ साथ सूर्य के उपासक भी थे  रोजाना जाकर सूर्य की आराधना किया करते थे. महाभारत के अनुसार कर्ण को उसके मित्र दुर्योधन द्वारा अंग देश का राजा बनाया गया, जिसे आज के विहार में स्थित भागलपुर माना जाता है. की ऐसा माना जाता है, की कर्ण षष्ठी और सप्तमी के दिन सूर्य की विशेष पूजाकरते थे और इसके  साथ ही मांगने आये याचको की इच्छा भी पूरी किया करते थे. तब से अंग देश के निवासी भगवान् सूर्य  पूजा करने लगे. कहा जाता है,इसी के कारण आज भी छठ पूजा बिहार और पूर्वोतर भारत में प्रमुख तौर पर मनाई जाती है.

राम और सीता से गहरा नाता है छठ पूजा का

राम और सीता से गहरा नाता है छठ पूजा का

बिहार में मुंगेर नाम के क्षेत्र में माता सीता ने सबसे पहले इस त्योहार को मनाया था.जब भगवान श्री राम अपने पिता की वचनपूर्ति के लिए माता सीता के साथ वनवास गए थे तब उस समय सीता के मन में वनवास के दौरान आने बाले संकटो के लिए काफी संकाएँ थी. और इन्ही शंकाओं को मिटने के लिए सीता  मुद्ल ऋषि के आश्रम में रहे कर सीता ने गंगा में छठ की पूजा की शुरुआत की थी,इसी तरह मां सीता ने छठ माता से पुत्र प्राप्ति की कामना भी की थी.कहा जाता है तभी से आज तक छठ पूजा का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है.

सूर्य की होती है आराधना

सूर्य की होती है आराधना

हमारे देश में भगवान् सूर्य को भी बहुत विशेष दर्जा दिया जाता है. हम आपको बता दे की  छठ पूजा विशेष रूप से भगवान् सूर्य को प्रसन्न करने के लिए की जाती है. और ये भी मन जाता है की जो व्यक्ति इस दिन छठ माता की पूजा करता है. तो छठ माता उसके सन्तानो की रक्षा करती है.

सच्ची श्रद्धा का महापर्व है ‘छठ पूजा

छठ पूजा एक कठिन तपस्या की तरह है छठ पूजा का त्यौहार ज्यादातर महिलाओ के द्वारा मनाया जाता है.और कुछ पुरुष भी छठ पूजा के पर्व पर व्रत रखते है.व्रत रखने वाले लोगों को भोजन के साथ ही सुखद जीवन का भी त्याग किया जाता है. जो लोग छठ पूजा  पर व्रत रखते है,उन्हें एक कमरे में फर्श पर चादर या कम्बल के सोना पड़ता है. इस त्यौहार में व्रत रखने बाले लोग व्रत में ऐसे कपडे पहनते है जिसमे किसी तरह की कोईसिलाई न हो.

चार दिन रहेगा ये त्यौहार

हर बार की तरह इस भी 13 नबम्बर से होकर चार दिन तक चलेगा।मतलव 2018 में इस बार छठ पूजा का त्यौहार 13 नबंबर से शुरू होकर 16 तक मनाया जायेगा। इसलिए इसमें आप भी शामिल हो और भगवान् सूर्य की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करे

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 छठ पूजा मुख्य चार दिन

षष्ठी

पहला दिन

छठ पूजा के पहले दिन को नहाई खाई भी कहा जाता है.इस दिन व्रत रखने बाले लोग नदी के घाट पर जाकर प्रातः कल पानी में डुबकी लगते है.और किसी पात्र में पानी लेकर बहार निकलते है.इसी पानी का उपयोग प्रसाद बनाने में किया जाता है. छठ पूजा के पहले दिन व्रत रखने बाले लोग दिन में एक बार ही भोजन करते है.

दूसरा दिन 

छठ पूजा के दुसरे दिन महिलाये पोरे दिन व्रत रखती है और शाम को सूर्यअस्त  के बाद ही अपने व्रत को खोलती है.छठ पूजा के दुसरे दिन को लोहंडा भी कहते है.छठ पूजा के दुसरे दिन 26 घंटे का व्रत होता है जिसमे पानी पीना भी वर्जित होता है.

तीसरा दिन 

छठ पूजा के तीसरे दिन प्रसाद बनाया जाता है.और लोग नदी के घाट पर जमा होते है.इस दिन सूर्यास्त से पहले संध्याकाल में सूर्य देव और छठी माता की पूजा की जाती है. संध्याकाल में सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है जिसे संध्या अर्ध्य भी कहते हैं.इस दौरान महिलाये लोकगीत भी गाती  है.

चौथा दिन

छठ पूजा  के चौथे  दिन आखरी पूजा होती है.और इसी दिन व्रत भी समाप्त होता है.इसी दिन व्रतधारी घाट पर इकट्ठा होते है.और आते हुए सूर्य को अर्ध्य देते हैं. उसके बाद प्रसाद वितरण भी होता है। प्रसाद में खीर और ठेकुआ मुख्य रूप से बनाया जाता है.

छठ पूजा का महत्व

शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को की गई छठ पूजा का संबंध संतान की आयु से होता है. मतलव छठ पूजा के दौरान भगवान् सूर्य देव और षष्ठी की पूजा करने से संतान और उसकी लम्बी आयु दोनों के लिए वरदान मिलता है.पंडित दिनेश के अनुसार साधु की हत्या करने के पश्चात् जब महाराज पाण्डु अपनी पत्नी और माद्री के साथ जाव वह वनवास गुजार रहे थे  तो उसी समय के दौरान रानी कुंती ने पुत्र प्राप्ति की अभिलाषा लेकर सरस्वती नदी में भगवान् सूर्य को अर्ग दिया था. और कुछ ही महीनो बाद कुंती को संतान की प्राप्ति हुई. इस पर्व पर यह द्रौपती के द्वारा भी किया गया था. इसलिए ऐसा माना जाता है की छठ पूजा का महत्व यही है की इस पर्व को करने से संतान की प्राप्ति होती है.

उम्मीद करता हूँ की आपको हमारी इस पोस्ट में छठ पूजा क्यों और कैसे मनाते है के बारे में उचित जानकारी मिल गयी आपको हमारी छठ पूजा की जानकारों कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये और इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर जरूर करे

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Arvind Kumar

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