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गुरु नानक देव जयंती व जीवन परिचय 2018 Guru Nanak Jayanti

सिख समुदाय के प्रथम धर्मगुरु नानक देव का कार्तिक पूर्णिमा के दिन जन्मोत्सव मनाया जाता है. सिखो के प्रथम गुरु नानक जी का जन्म 15 अप्रैल,1469  को ननकाना साहिब {तलवंडी} में हुआ था.  लेकिन श्रद्धालु गुरु नानक जी का जन्मोत्सव  कार्तिक पूर्णिमा को मनाते है.  गुरु नानक जी के पिता का नाम  कालूचंद्र बेदी और माता का नाम  त्रिपता था.  गुरु नानक देव जी ने बग़दाद तक आध्यात्मिक,परमेश्वर के साथ एकता और भक्ति के महत्व को फैलाया था. गुरु जी  लोगो की रक्षा के लिए  अपना सब कुछ वलिदान कर दिया था. कहा जाता है, की सिख धर्म में दस गुरु थे जिनमे गुरु नानक जी का स्थान सबसे पहले मन जाता है.इसलिए आज भी सिख समुदाय के लोग आज भी गुरु नानक जी का जन्मदिन बड़े हर्षोउल्लास से मनाते है. यह दिन सिख समुदाय के लोगो के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन होता है.

पूरा नाम                 –— नानक
जन्म                      –— 15 अप्रैल, 1469
जन्मस्थान             –— ननकाना साहिब (तलवंडी).
पिता                      – —कल्यानचंद (मेहता कालू )
माता                      –— तृप्ता देवी
शिक्षा                     —– पंजाबी, हिन्दी फारसी तथा संस्कृत की शिक्षा ली.
विवाह                    ——सुलक्षणा देवी के साथ.

 गुरु नानक जयंती गुरु नानक जयंती

इस बार 2018 में गुरु नानक जयंती 23 नबम्बर को मनाई जाएगी। गुरुनानक जी की जयंती   सिख समुदाय के लोग समुदाय बेहद हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाते है। गुरु नानक जयंती का दिन  सिख समुदाय के लोगो के लिए  दिवाली जैसा ही पर्व होता है ,गुरु नानक जयंती के दिन गुरुद्वारों में शबद-कीर्तन किए जाते हैं। जगह-जगह लंगरों का आयोजन होता है और गुरुवाणी का पाठ किया जाता है. गुरु नानक जयंती खुशियों और आनंद का त्यौहार है, जो की गुरु नानक की शिक्षाओं पर भी प्रकाश डालता है.

गुरु नानक जी का बचपन

गुरु नानक जी बचपन से ही आधयात्मिक व् ज्ञानशील थे.उनके बचपन के किस्से आज भी बेहद प्रासंगिक हैं. पड़ने लिखने में गुरु जी का मन नहीं लगा और उन्होंने 7-8 साल की अवस्था में ही स्कूल छोड़ दिया था इसके बाद वो अपना सारा समय आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करने लगे। बचपन के समय में कई चमत्कारिक घटनाएं घटी जिन्हें देखकर गाँव के लोग इन्हें दिव्य व्यक्तित्व मानने लगे। बचपन के समय से ही इनमें श्रद्धा रखने वालों में इनकी बहन नानकी तथा गाँव के शासक राय बुलार प्रमुख थे. गुरु नानक जी ने बचपन में ही कई प्रादेशिक भाषाएँ सीख ली थी जैसे-फ़ारसी,अरवी। गुरु नानक जी का विवाह 1487 में  सुलक्षणा देवी नमक स्त्री के साथ हुआ था. नानक जी के दो पुत्र भी थे.

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गुरु नानक जी का सन्देश

बर्ष 1496 में गुरु नानक जी ने अपनी पहली भविस्यबाणी की थी, जिसमे उन्होंने कहा था की कोई भी “हिन्दू नहीं है. और न कोई मुसलमान है” और उन्होंने कहा था की यह एक महत्वपूर्ण घोसणा है.जो न सिर्फ आदमी के भाईचारा,और पितृत्व की घोषणा है,  बल्कि यह भी स्पष्ट है की मनुष्य की प्राथमिक रूचि किसी भी प्रकार के अध्यात्मिक सिधांत में नहीं है, वह तो मनुष्य और उसके किस्मत में हैं। इसका मतलब है अपने पड़ोसी से  करो जितना आप खुद से करते है.

गुरु नानक देव जी का मिशन

गुरु नानक जी अपने मिशन की शुरुआत मरदाना के साथ मिलकर की थी. उन्होंने अपने इस सन्देश के साथ-साथ कमजोर लोगो की मदद के लिए जोरदार प्रचार लिया था. और इसके साथ ही गुरु नानक जी ने जाती भेद, मूर्ति पूजा और छद्म धार्मिक विश्वासों के खिलाफ प्रचार किया।उन्होंने अपने सिद्धांतो और नियमो के प्रचार  तक को छोड़ दिया था. गुरु नानक जी हिन्दू मुस्लिम एकता के भरी समर्थक थे  उन्होंने हिन्दू और मुस्लमान दोनों धर्मों के विचारों को सम्मिलित करके एक नए धर्म की स्थापना की जिसे  बाद में सिख धर्म के नाम से जाना गया।

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गुरु नानक का जीवन और सिद्धांत

गुरु नानक जयंती भारतियों लोगो के लिए इतना पवित्र त्यौहार क्यों है ये समझना बहुत ही जरूरी है.की गुरु नानक जी के कार्यो ने भारत के सम्पूर्ण इतिहास को कैसे आकर दिया। गुरु नानक जी के जन्म से पहले,भारत मूल रूप से जाति प्रथा के रूप में जाने बाली सामाजिक श्रेणी द्वारा परिभाषित किया जाता था इस प्रथा की वजह से गरीब लोग गरीब  रहते थे और अमीर लोग निरंतर रूप से अपनी शक्ति को विस्तारित करते थे. इसी समय गुरु नानक जी ने ये समझ लिया था.की यह प्रथा गलत है. इसिलए गुरु नानक जी ने इससे लड़ने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। और गुरु नानक जी ने कुछ ही समय में लोगो के मन से जाति प्रथा को नष्ट  कर दिया परन्तु वह मुग़ल शासको के राजनैतिक सश्त्रु बन गए थे.

गुरु नानक देव जी की प्रमुख शिक्षाये

गुरु नानक देव जी के अनुसार सब एक ईश्वर की उत्पत्ति है. उसके लिए कोई भी छोटा या बड़ा नहीं है. नानक जी एक महान कवी थे इस रूप में ये हिंदी व् पंजाबी के एक महान कवी माने जाते थे.आचार्य विनोवा भावे के अनुसार नानक जी की कीर्तन साहिल  संसार के एक उच्च काव्य का नमूना है.गुरु नानक जी ने कहा था

  • ईश्वर को अपने भीतर ढूंढो
  • कोई भी मनुस्य दुसरे को अपने से छोटा न समझे।
  • सभी जाती और धर्म सामान है.
  • ईश्वर को पाने के लिए किसी भी प्रकार का बाहरी आडम्बर बेकार है.
  •  कभी भी किसी का हक नहीं छीनना चाहिए
  • चिंता मुक्त रहकर अपने कर्म करते रहना चाहिए। संसार को जीतने से पहले स्वयं अपने विकारों पर विजय पाना अत्यंत आवश्यक है.
  • चिंता मुक्त रहकर अपने कर्म करते रहना चाहिए। संसार को जीतने से पहले स्वयं अपने विकारों पर विजय पाना अत्यंत आवश्यक है
गगन में थाल, रवि चन्द दीपक, बने तारका मंडल जनक मोती. धूप मलियान लौ, पवन चवरे करे, सफल बनराय फुलंत ज्योति.”

गुरु नानक जी के द्वारा लिखी गयी ये वाणी श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में आज भी निहित है.

 गुरु नानक देव जी की मृत्यु

गुरु नानक देव जी ने 22 सितम्बर 1539 में करतारपुर नामक एक स्थान पर अपने शरीर को त्याग दिया था. जो की इस समय पाकिस्तान में है ऐसा कहा जाता है कि नानक की मृत्यु के बाद उनकी अस्थियों की जगह फूल मिले थे। इन फूलों का हिन्दू और मुस्लि अनुयायियों ने अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार किया

दोस्तों गुरु नानक जयंती एक शांतिपूर्ण उत्सव है जो की लोगो को गुरु नानक देव जी और भारतीये जाति प्रथा को समाप्त करने की उनकी इच्छा की याद दिलाता है. दोस्तों आपको हमारी गुरु नानक देव जी के बारे में गयी  ये पोस्ट कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये। और इस पोड्ट को अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करे

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Arvind Kumar

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