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श्रीमद्भगवद्गीता से जुड़े भगवान कृष्ण के अनमोल विचार हिंदी में

आज की पोस्ट में मै आपके लिए श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा ग्रन्थ है जीवन का पूरा सार दिया हुआ है. उससे जुड़े भगवान श्री कृष्ण के अनमोल विचारों को जानेंगे। आप सभी जानते है की श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा ग्रन्थ है जिसमे मनष्य के जन्म से लेकर मनुष्य के मृत्यु के बाद के चक्र को श्रीमद्भगवद्गीता ग्रन्थ में विस्तार से बताया गया है. श्रीमद्भगवद्गीता हमारे प्राचीन भारत के आध्यात्मिक ज्ञान को दर्शाता है. कहा जाता है की भगवद शब्द का मतलब है भगवान और गीता का गीत यानि की भगवान का गाया हुआ गीत।

भगवान श्री कृष्ण महाभारत  के समय कुरुक्षेत्र में भगवद गीता के सामने  अर्जुन था भगवद गीता में कुल 700 संस्कृत छंद, 18 अध्यायों के भीतर निहित है जो की 3 बर्गों में विभाजित है, प्रत्येक में 6 अध्याय हैं. इस जीवन में सफलता पाने के लिए कर्म सबसे पहला बड़ा रास्ता है. भगवत गीता में श्री कृष्ण ने कर्म से जुड़े कुछ ऐसे अनमोल विचारो को इस संसार के समक्ष रखा था जो अगर मनुष्य अपने जीवन में अमल कर ले तो इस दुनिया की कोई भी शक्ति उसे किसी क्षेत्र में पराजित नहीं कर सकती। तो क्यों न आप भी उन्हें अपने जीवन में अमल करे तो आइये पड़ते है श्रीमद्भगवद्गीता में लिखित कर्म से जुड़े अनमोल वचनों को-

भगवान कृष्ण के अनमोल विचार हिंदी में

श्रीमद्भगवद्गीता से जुड़े भगवान कृष्ण के अनमोल विचार हिंदी में

जिस प्रकार कपड़े फटने या पुराने होने पर लोग उसका त्याग कर देते है और नये वस्त्र धारण करते है ठीक उसी प्रकार आत्मा भी पुराने शरीर को छोडकर नये शरीर धारण करती है यही प्रकृति का जीवन चक्र है जो लगातार चलता रहता है
यदि आप अपने मन को नियंत्रित नही करते तो वही मन आपका शत्रु मन बन जाता है और जो लोग अपने मन पर काबू पा लेते है उनके लिए इस दुनिया में कुछ भी असम्भव (Impossible) नही है
तुमने क्या खो दिया जो रोते हो,तुम क्या लाये थे जो तुमने खो दिया तुमने क्या पैदा किया जो की नाश हो गया तुम न तो कुछ लेकर आये थे ना ही कुछ लेकर जाओगे जो लिया यही से लिया जो कुछ भी दिया यही से दिया और जो लिया इसी ईश्वर से लिया और जो दिया इसी ईश्वर को ही दिया
आत्मा न जन्म लेती है ना ही मरती है ना ही इसे जलाया जा सकता है ना ही इसे जल से गिला किया जा सकता है आत्मा तो अमर अविनाशी है
सभी खाली हाथ हाथ आते है और खाली हाथ ही चले जाना है क्यों व्यर्थ चिंता करते हो जो आज तुम्हारा है कल किसी और का था और फिर कल किसी और का होगा क्यों इसे अपना समझकर मगन हो रहे हो यही तुम्हारे दुखो का मूल कारण है
किसी दूसरे के जीवन के साथ पूर्ण रूप से जीने से अच्छा है की हम अपने स्वं के भाग्य के अनुसार अपूर्ण जिए
मन की गतिविधियों, होश श्वास और भावनाओ के माध्यम से भगवान् की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है. और लगातार तुम्हे बस एक साधना की तरह प्रयोग कर सभी कार्य कर रही है.
मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना ठीक नहीं है. लेकिन अभ्यास से इसे बश में किया जा सकता है.
जन्म लेने बाले के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है जितना की मृत होने बाले के लिए जन्म लेना इसलिए जो अपरिहार्य है उस पर शोक मत करो
एक उपहार तभी असली और पवित्र है. जब ह्रदय से किसी व्यक्ति को सही समय और सही जगह पर दिया जाये और जब उपहार देने बाला व्यक्ति दिल में उस उपहार के बदले कुछ पाने की उम्मीद न रखता हो.
विवरण अगर आप अपने लक्ष्य को पाने के लिए दृण संकल्प ले लेते है. और दिन- रात मेहनत करते है. तो आपको रास्ते में जितने भी संकट, मुस्किले आये, आप उन्हें पार कर जायेंगे
बुद्धिमान व्यक्ति को बुद्धिविहीन व्यक्ति जो की कर्म के फलो की चिंता में लगा हुआ है उसके दिमाग को कमजोर नहीं करना चाहिए
हम जो देखते/निहारते हैं वो हम है, और हम जो हैं हम उसी वस्तु को निहारते हैं। इसलिए जीवन में हमेशा अच्छी और सकारात्मक चीजों को देखें और सोचें
किसी और का काम पूर्णता से करने से कही अच्छा है की अपना काम करे भले ही उसे अपूर्ण से करना पड़े
मै सभी प्राणियों को एक समान रूप से देखता हूँ न कोई मुझे कम प्रिये है न अधिक लेकिन जो मेरी प्रेमपूर्वक आराधना करते है वो मेरे भीतर रहते है और मई उनके जीवन में आता हूँ
जो व्यक्ति किसी भी देवता पर पूजा या विश्वाश करने की इच्छा रखता है. मै उसका विश्वास उसी देवता में दृण कर देता हूँ
भगवान या परमात्मा की शांति उनके साथ होती है जिसके मन और आत्मा में एकता/सामंजस्य हो, जो इच्छा और क्रोध से मुक्त हो, जो अपने स्वयं/खुद के आत्मा को सही मायने में जानते हों
: हमारी गलती अंतिम वास्तविकता के लिए यह ले जा रहा है, जैसे सपने देखने वाला यह सोचता है की उसके सपने के अलावा और कुछ भी सत्य नहीं है
हम जो देखते है वो हम है और जो हम है उसी को निहारते है इसलिए जीवन में हमेशा अच्छी और साकारत्मक चीजों के देखो और सोचो
नी व्यक्ति को कर्म के प्रतिफल की अपेक्षा कर रहे अज्ञानी व्यक्ति के दीमाग को अस्थिर नहीं करना चाहिए।
क्रोध से भ्रम पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है. जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है.’
तुम उसके लिए शोक करते हो हो जो शोक करने के काबिल नहीं और फिर भी ज्ञान की बाते करते हो, बुद्धिमान व्यक्ति ना जीवित और न ही मृत्यु व्यक्ति के लिए शोक करते है
हम जो देखते है वो हम है और जो हम है उसी को निहारते है इसलिए जीवन में हमेशा अच्छी और साकारत्मक चीजों के देखो और सोचो
अपने ज्ञान से अपने भीतर के अज्ञान को तलवार से काटकर उसका वध करो अपने अनुशासन में रहो और जागो
मन की गतिविधियों, होश श्वास और भावनाओ के माध्यम से भगवान् की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है. और लगातार तुम्हे बस एक साधना की तरह प्रयोग कर सभी कार्य कर रही है.
मनुष्य अपने विचारो से महान बनता है जैसा वह सोचता है वही होता है
सम्मानित व्यक्ति के लिए उसका अपमान मृत्यु से बुरा है क्युकी दुनिया अपमान की ही बात करेगी
बुद्धिमान व्यक्ति को बुद्धिविहीन व्यक्ति जो की कर्म के फलो की चिंता में लगा हुआ है उसके दिमाग को कमजोर नहीं करना चाहिए

आशा करती हूँ की आपको श्रीमद्भगवद्गीता से जुड़े भगवान कृष्ण के अनमोल विचार पसंद आये होंगे आप हमे कमेंट करके बता सकते है की आपको हमारी आज की पोस्ट कैसी लगी. अगर आपके पास भगवन कृष्ण जे जुड़े ऐसे विचार है तो आप उन्हें कमेंट के जरिये शेयर कर सकते है

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jyoti bharti

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम ज्योति भारती है मैंने हिंदी से (M.A) किया है मुझे कॉलेज के दिनों से ही हिंदी लिखने का बहुत शौक है.इसलिए मै किसी भी वेबसाइट के लिए हिंदी में शायरी, और बायोग्राफी के बारे में जानकारी शेयर करती हूँ

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