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जानिए मकर संक्रांति कब क्यों कैसे मनाते है-When does Makar celebrate Sankranti in hindi

मकर संक्राति एक ऐसा त्योहार है.जो पूरे देशभर में जनवरी के महीने में अलग-अलग संक्राति की हिसाब से मनाया जाता है. भारत में ऐसे भी कई राज्य है.जहाँ मकर  सिर्फ अलग अलग नामो से जाना जाता है बल्कि कई इसमें धार्मिक भी भिन्न है.यह पर्व सूर्य के राशि के परिवर्तन करने के साथ ही सेहत और जीवनशैली से भी इसका गहरा नाता है. बही मकर संक्राति किसानो की मेहनत से जुड़ा हुआ त्यौहार है. क्योकि इसी समय फसल की कटाई का समय भी होता है.जैसे की मूंगफली,दही,चुड़ा,गुड़,तिल, आदि  और बही खिचड़ी भी इस दिन विशेष रूप से बनायीं जाती है.और उस खिचड़ी का प्रसाद बनाकर सूर्य देव को स्वरूप अर्पित किया जाता है. और भक्तो में भी बांटी जाती है.मकर संक्राति पर पूरे भारत में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है, पूरे भारत में इसे बड़ी धूम धाम से मनाय जाता है. आइये मित्रो मकर संक्राति के बारे में थोड़ा नीचे बिस्तार से जानते है, की आखिर मकर संक्रांति कब क्यों कैसे मनाते है. तो अगर आप मकर संक्राति के बारे में ज्यादा कुछ जनाना चाहते है तो प्लीज हमारी इस पोस्ट को नीचे तक जरूर पड़े.

Makar Sankranti

मकर संक्राति कब मनाया जाता है.

भारतीय लोगो प्रमुख त्यौहार अलग-अलग राज्यों में शहरों में और गांव में बहा की परम्परा के अनुसार मनाया जाता है.मकर संक्राति पर अलग-अलग राज्यों में इस गंगा के किनारे माघ मेले का आयोजन भी किया जाता है.कुम्भ मेले की शुरुआत भी इसी दिन से होती है. मकर संक्राति प्रमुख रूप से 14 जनवरी या 15 जनवरी को मनाया  जाता है.

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मकर संक्राति से जुडी पौरणिक कथाये

भगवान बिष्णु से जुड़ा है मकर संक्राति 

माना जाता है की मकर संक्राति के दिन ही भगवन बिष्णु ने असुरो और देवताओ के बीच चल रहे युद्ध का अंत  करके समाप्ति की घोषणा की थी.इसके साथ ही भगवन बिष्नु जी ने असुरो का सरो को मंदार पर्वत में दबा दिए थे इस प्रकार इस दिन बुराइयों और नकारात्मक को ख़त्म करने का दिन भी माना जाता है.

भागीरथ  और गनगा से जुड़ा है मकर संक्राति 

ऐसा माना जाता है  गंगा जी को धरती पर लेन बाले राजा  भागीरथ ने अपने पूर्वजो के लिए इस दिन तरणं किया था. और इसी दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली इसी लिए कहा जाता है। की मकर संक्राति के दिन गंगा के किनारे मेले का आयोजन भी किया जाता है.

शनि और सूर्य से जुडी कहानी 

इस पर्व से एक पूरे जुडी मान्यता के अनुसार इस दिन भगवन सूर्य अपने बेटे शनि से मिलने स्वं उसके घर जाया करते थे.चुकी शनिदेव मकर राशि के स्वामी है इसलिए इस दिन को मकर संक्राति के नाम से जाना जाता है.

भीष्म पितामाह की मृत्यु से जुडी कहानी 

महाभारत में भी इस दिन का उल्लेख किया गया है.क्योकि मकर संक्राति के दिन ही भीष्मपितामाह ने स्वम अपने प्राण त्यागे थे. क्योकि कहा जाता है. की उत्तरायण के दिन मृत्यु होने पर आपको दूसरा जन्म नहीं लेना पड़ता है. और पूनर्जन्म से छुटकारा मिल जाता है.

यसोदा और कृष्ण से जुड़ा है मकर संक्राति

ये भी इतिहास में मन जाता है, की कृष्ण के जन्म के समय यसोदा जी ने व्रत किया था.तभी उसी समय सूर्य देवता उत्तरायण हो रहे थे और उसी दिन मकर संक्राति भी थी.  तभी से मकर संक्राति व्रत  प्रचलन शुरू हुआ था

मकर संक्राति क्या है.

सूर्य की एक राशि को दूसरी राशि में जाने की प्रक्रिया को मकर संक्राति कहते है.एक राशि से दूसरी राशि तक जाने में लगने बाले समय को ही सौर मास कहते है.बैसे तो सूर्य में12 संक्राति है. लेकिन इनमें से चार संक्रांति महत्वपूर्ण हैं जिनमें मेष, कर्क, तुला, मकर संक्रांति हैं. मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त में स्नानए दान और पुण्य के शुभ समय का विशेष महत्व है.

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गुड़ और तिल लगाकर नर्मदा में स्नान करना लाभदायी होता है.इसके बाद दान संक्राति में गुड़ तेल ],कम्बल,फल छाता,आदि   लाभ मिलता है.और और पुण्यफल की प्राप्ति होती है. 14 जनवरी ऐसा दिन है, जब धरती पर अच्छे दिन की शुरुआत होती है. ऐसा इसलिए कि सूर्य दक्षिण के बजाय अब उत्तर को गमन करने लग जाता है.जब जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण  और गमन करता है.तब सूर्य की किरणों को ख़राब माना जाता है.

मकर संक्राति कैसे मनाये

भारत के अलग अलग हिस्सों में मकर संक्राति के मनाने का अपना-अपना तरीका अलग अलग है. हर राज्य में अपने तरह से मानते है. जैसे की आंध्र प्रदेश,केरल,और कर्नाटक में इसे केवल संक्राति के नाम से जाना जाता है.बही तमिलनाडु में इस पोंगल के रूप में मनाया  जाता है. और पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है.

ऐसी मान्यता है, की मकर संक्राति के दिन गंगा,यमुना और सरस्वती के त्रवेणी संगम,प्रयाग में सभी देवी-देवता अपना स्वरुप बदलकर स्नान के लिए आते है. इसलिए ऐसा माना जाता है की मकर संक्राति पर पवित्र  में स्नान करने से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है.

आशा करता हूँ की आपको हमारी मकर संक्रांति कब क्यों कैसे मनाते है पोस्ट पसंद आयी होगी आपको हमारी पोस्ट मकर संक्रांति कब क्यों कैसे मनाते है कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये। और हमारी इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे ताकि उन्हें भी पता चल सके की मकर संक्रांति कब क्यों कैसे मनाते है.

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Arvind Kumar

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