Biography

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जीवनी Pandit Deendayal Upadhyay Biography

पंडित दीनद्याल उपाध्यय जी एक महान विचारक और एक राजनेता के साथ-साथ समाजशास्त्री,इतिहासकार, पत्रकार थे इन्होने अपने कॉलेजो के दिनों मि राजनीती में आने का निर्णय ले लिया था और बहुत ही कम समय में इन्होने कई उपलब्धिया भी प्राप्त कर ली थी.उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई और भारतीय जनसंघ (वर्तमान, भारतीय जनता पार्टी) के अध्यक्ष भी बनेभारतीय जनता पार्टी को बनाने में इनका महत्पूर्ण योगदान था.हम आपको बता दे की बचपन में एक ज्योतिषी  ने इनकी जन्मकुंडली देख कर भबिषबाड़ी की थी की आगे चलकर  यह बालक एक महान बिद्वान एवं बिचारक बनेगा और ये बात आगे चलकर ज्योतिषी की सच हुयी

दीनदयाल उपाध्याय का नाम बचपन और प्रांरभिक जीवन

दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर को उतार प्रदेश के मथुरा जिले में हुआ था. उपाध्याय जी एक मध्य परिवार से थे उनके पिता का नाम श्री भगवती प्रसाद और माता का नाम रामप्यारी था. उपाध्याय जी पिता एक सहायक स्टेशन के रूप में कार्यरत थे.और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की माता धार्मिक विचारधरा रखने बलि महिला थी. उपाध्याय जी  जब ढाई साल के थे तब इसी बीच उनके पिया जी का स्वर्गवास हो गया और कुछ ही समय बाद उनकी माता भी बीमार रहने लगी  बीमारी के चलते 8 अगस्त 1924 को उनकी माता का भी निधन हो गया. इसके बाद उनका लालन पोषण उनके नाना के यहाँ हुआ.

दीनदयाल उपाध्याय जी शिक्षा

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और मेहनती थे. शिक्षा प्राप्त करने के लिए उपाध्याय जी ने सीकर,राजस्थान के विद्यालय में दाखिला लिया।जहा से पंडित दीनदयाल जी ने हाईस्कूल में टॉप किया था. इस उपलब्धि के लिए उन्हें महाराजा कल्याण सिंह के  द्वारा गोल्ड मेडल से समांनित किया गया था.दीनदयालजी ने अपनी इंटरमीडिएट की परीक्षा पिलानी में विशेष योग्यता के साथ उत्तीर्ण की.  इसके बाद पंडित दीनदयाल जी बी.ए. की शिक्षा ग्रहण करने के लिए कानपूर आ गए जहां वो सनातन धर्मं कॉलेज में भर्ती हो गए उन्होंने बी.ए. की परीक्षा भी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की |इसके बाद ऍम.ए. की पढ़ाई के लिए वो आगरा आ गए परन्तु किसी कारण वो M.A पढ़ाई पूरी नहीं कर सके.

भारतीय लोकतंत्र और समाज के प्रति उपाध्याय जी के विचार 

दीनदयाल उपाध्याय अपने जीवन के प्रारंभिक वर्षों से ही समाज सेवा के प्रति अत्यधिक समर्पित थे.दीनदयाल उपाध्याय की अवधारणा थी कि आजादी के बाद भारत का विकास काअपनी भारतीय संस्कृति के आधार पर हो

ये भी पड़े

पंडित जी ने द्वारा लिखी गयी कुछ कृतियां

पंडित दीनदयाल जी एक अच्छे साहित्यकार व् लेखक थे.भारत के राष्ट्रीय और राष्ट्रजीवन के निर्माता दीनदयाल जी ने भारत की सनातन धर्म विचारधारा को युगानुकुल में वयक्त किया और देश को एकात्म मानववाद जैसे प्रगतिशील विचारोत्तेजक प्रदान की. पंडित जी ने एक बार कहा था. ”’ वसुधैव कुटुम्बकम् ” हमारी सभ्यता से प्रचलित हैं.पंडित एक पत्रकार के साथ-साथ एक शुभ चिन्तक और एक लेखक भी रहे हैं. उनके कुछ प्रमुख पुस्तकें इस प्रकार है,

  • दो योजनए
  • राष्ट्र जीवन की दिशा
  • राजनैतिक डायरी
  • एकात्मक मानवबाद

पंडित दीनदयाल जी का राजनैतिक जीवन

पंडित दीनदयाल जी 1937 से 1968 तक भारत के राष्ट्र जीवन में क्रियाशील रहे.वे आरएसएस  के संपर्क में आये.पर 1942 में उपाध्याय जी आरएसएस के जीवन प्रतिकारी बने सन 1952 से 1967 तक उपध्याये जी भारतीय जनसंघ के महामंत्री बने और यही जनसंघ आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी बनी.

जब स्वाभाव को धर्म के सिद्धांतो के अनुसार बदला जाता है,

तब हमे संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होती है.

अपने इन्ही उच्च विचारो द्वारा भारत के लोगो के दिलो और दिमाग में खास जगह बनाने बाले और एकात्मक,मानववाद।और राष्ट्रीय जनसंघ के अध्यक्ष एवं भारत के तेजस्वी में से एक रहे.

एक बार दीनदयाल की कार्यछमता,और परिश्रम से प्रभाबित होकर डॉक्टर श्यामा प्रसाद जी ने कहा था

यदि मुझे ऐसे दो दीनदयाल मिल जाये तो मै देश की राजनीती का नक्शा बदल दूंगा

पंडित दीनदयाल जी का निधन

19 दिसंबर 1967 दींनदयाल उपाध्याय जी को भारतीय जनसंघ का अध्यक्ष चुना गया परन्तु प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था क्योकि 11 फरवरी 1968 को उपाध्याय जी की रहस्यमंद तरीके से मौत हो गयी. मुगलसराय पर उनकी लाश मिलने से पूरे देश में शौक की लहर दौड़ गयी.

दोस्तों परम ब्रह्म में विलीन होने के बाद भी पंडित दीनदयाल जी अपनी लेखनी।ज्ञान और उच्च विचारो से आज भी हमारे डिम में जिन्दा है.ऐसे महान व्यक्ति को हम शत शत नमन करते है.दोस्तों मै आशा करता हूँ की आपको पंडित दीनद्याल जी के बारे में उचित जानकारी मिल गयी होगी

About the author

Arvind Kumar

Hello friends My name is Arvind Kumar. Here I write related articles on festival, Technology, Health, and Study at YourHindi.Com.

Leave a Comment