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चाणक्य के अनमोल विचार-thoughts of Chanakya In Hindi

आज की पोस्ट में हम चाणक्य के अनमोल विचार के बारे में जानगे जो हमे अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है.

दोस्तों अपने वचपन में चाणक्य निति के बारे में तो सुना ही होगा और अपने पचपन में  चाणक्य के बारे में पड़ा भी होगा। चाणक्य  ऐसे शख्शियत थे जिनका नाम सुनते ही आज भी लोगो को अपने सुनहरे  इतिहास (History )की याद आ जाती है.भारत की महाँन राजनीती की याद आ जाती है. चाणक्य एक ऐसे शक्श थे जिन्होंने अपनी प्रतिभा और अपने दिमाग की ताकत से पूरी राजनीति को ही बदल दिया था.  चाणक्य का नाम राजनीती तथा उसके द्वारा किये गए लोगो की भलाई के लिए किये गए कार्यो के लिए आज भी वो लोगो और इतिहास में अमर है.  चाणक्य का गौरवशाली व्यक्तित्व आज भी लोगो के लिए प्रेणना का स्रोत बना हुआ है.  चाणक्य के विचार आज भी लोगो को कठिनायों से निकलने के लिए और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है.तो आइये जानते  चाणक्य के ऐसे विचारो को जो हम सभी को अपने जीवन से कुछ सिखने के लिए प्रेरित करते है-

चाणक्य के अनमोल विचार

  1. सारस की तरह एक बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए और अपने उदेस्य को स्थान की जानकारी, समय और योग्यता के अनुशार प्राप्त करना चाहिए।
  2. जैसे-जैसे भय आपके नजदीक आये,चरण उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिये
  3. कुछ काम करने से पहले हमेशा अपने आप से ये तीन प्रश्न जरूर पूछे-मै यह क्या कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या होंगे, क्या मै इसमें सफल होऊंगा। केवल जब आप गहराई से सोचते है और इन सवालो के समाधान प्राप्त करते है.तभी आगे बड़े.
  4. आदमी अकेला पैदा होता है. और अकेले ही मर जाता है.और बह अपने अच्छे बुरे परिणाम के अनुभव करता है. वह नर्क और स्वर्ग के लिए भी अकेले ही जाता है.
  5. शिक्षा सबसे अच्छी दोस्त है.एक शिक्षित व्यक्ति के लिए हर जगह सम्मान मिलता है.सौंदर्य और युवा ताकत बिना शिक्षा के कुछ भी नहीं है.
  6. सबसे बड़ा गुरु मंत्र है की किसी के साथ अपने रहस्य कभी साझा मत करो यह आपको नष्ट कर देगा
  7. मुर्ख लोगो से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए क्योकि ऐसा करने से हम अपना समय नष्ट करते है
  8. भगवान् मूर्तियों में नहीं बस्ता बल्कि अपनी अनभूति ही आपका ईस्वर है और आत्मा आपका मंदिर।
  9. भाग्य उनका साथ देता है जो कठिन परिस्थितियों का सामना करके भी अपने लक्ष्य के प्रति ढृढ रहते है.
  10. जो तुम्हारी बात को सुनते हुए इधर उधर देखे उस आदमी पर कभी भी विस्वास न करे.
  11. कोई भी व्यक्ति ऊँचे स्थान पर बैठकर ऊँचा नहीं होता है. बल्कि बो हमेशा अपने गुणों से ऊँचा होता है.
  12. बहुत से गुणों के होने बाद भी सिर्फ एक दोष सबकुछ नष्ट कर देता है
  13. जो व्यक्ति शक्ति के न होने पर मन में हर नहीं मानता उसे संसार की कोई भी ताकत परास्त नहीं कर सकती है.
  14. कोई जंगल सारा जैसे सुगंध वृक्ष से महक जाता है. ठीक उसी तरह एक गुणवान पुत्र से सारे कुल का नाम बढ़ जाता है.
  15. मनुस्य को कोई भी कार्य बिना सोचे समझे नहीं करना चाहिए ये उसे बर्बाद कर सकता है.
  16. दुर्जन व्यक्ति के साथ अपने भाग्य को नहो जोड़ना चाहिए सदाचार से मनुस्य की आयु और यश दोनों बढ़ते है.
  17. जो कुलीन न होकर भी विनीत है वः श्र्ष्ठ कुलीन से भी बढ़कर है.याचको का अपमान अथवा उपेक्षा नहीं करनी कहहिये।
  18. कभी भी महँ व्यक्तियों को उपवास नहीं करना चाहिए क्योकि आपको कार्य ही सफलता और असफलता का संकेत देते है.
  19. स्त्री रत्न से बढ़कर कोई भी दूसरा रत्न नहीं है रत्नो की प्राप्ति बहुत ही कठिन है.अर्थात श्रेष्ठ न्र और नारियों की प्राप्ति अत्यंत दुर्लभ है.
  20. कुशल लोगो को रोजगार का भय नहीं होता है.। जितेन्द्रिय व्यक्ति को विषय-वासनाओं का भय नहीं सताता।
  21. मुर्ख व्यक्ति उपकार करने बालो का भी उपकार करता है.इसके विपरीत जो इसके विरुद्ध आचरण करता है विद्वान होता है.
  22.  मृतिका पिंड (मिट्टी का ढेला) भी फूलों की सुगंध बढ़ा देता है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवशय पड़ता है जैसे जिस मिटटी में फूल खिलते है उस मिट्टी से भी फूलों की सुगंध आने लगती है
  23. रत्न कभी भी खंडित नहीं होता है अर्थात विद्वान व्यक्ति में कोई साधारण दोष होने पर जयदा धायण नहीं देना चाहिए।
  24. गाय के स्वाभाव को जानने  बाला ही दूध का उपभोग करता है.नीच व्यक्ति के सामने रहस्य और अपने दिल की बात नहीं करनी चाहिए।
  25. कायर व्यक्ति को कार्य की चिंता नहीं होती है.अपने स्वामी के स्वाभाव को जानकर ही आश्रित कर्मचारी कार्य करते है.
  26. परीक्षा करके विपत्ति को दूर करना चाहिए। अपनी शक्ति को जानकार ही कार्य करें। स्वजनों को तृप्त करके शेष भोजन से जो अपनी भूख शांत करता है, वह अमृत भोजी कहलाता है
  27. विचार न करने बाले व्यक्ति को लक्ष्मी त्याग देती है.परीक्षा किये बिना कार्य करने से कार्य विपत्ति में पड़ जाता है.
  28. जो अपने कर्तव्यों से बचते है, वे अपने आश्रितों परिजनों का भरण-पोषण नहीं कर पाते। जो अपने कर्म को नहीं पहचानता, वह अँधा है
  29. जिन्हे भाग्य प् विस्वाश नहीं होता है.उनके कार्य पूरे नहीं होते है.कार्य न करने से विध्न पड़ता है.
  30. अज्ञानी व्यक्ति के कार्यो को बहुत अधिक महत्वा नहीं देना चाहिए।
  31. सोने के साथ मिलकर चांदी भी सोने जैसी दिखाई पड़ती है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है.
  32. धन के नशे में अँधा व्यक्ति हितकरी बाटे नहीं सुनता और न अपने निकट किसी को देखता है.
  33. दिन में कभी भी सपने नहीं देखना चाहिए क्योकि दिन में सोने से आयु कम होती है.
  34. जो व्यक्ति जिस कार्य में कुशल हो उसे उसी कार्य में लगना चाहिए।
  35. रोग शस्त्रु से भी बड़ा होता है.
  36. मूर्खो से कभी भी वियवद नहीं करना चाहिए।मुर्ख से मुर्ख जैसी ही भाषा बोले।
  37. भाग्य का शमन शांति से करना चाहिए। मनुष्य के कार्य में आई विपत्ती को कुशलता से ठीक करना चाहिए
  38. दूसरे का धन तिनकेभर भी नहीं चुराना चाहिए। दूसरों के धन का अपहरण करने से स्वयं अपने ही धन का नाश हो जाता है
  39.  धनविहीन महान राजा का संसार सम्मान नहीं करता। दरिद्र मनुष्य का जीवन मृत्यु के समान है
  40. दंडनीति से राजा की प्रवति अर्थात स्वभाव का पता चलता है। स्वभाव का मूल अर्थ लाभ होता है.
  41. समय समझने बाला कार्य सिद्ध करता है.
  42. समय का ज्ञान न रखने बाले राजा का कर्म समे के द्वारा नष्ट हो जाता है.
  43. परीक्षा करने से लक्ष्मी स्थिर रहती है.
  44. सिंह कभी भी भूखा होने पर तिनका नहीं खाता है.
  45. एक बिगडैल गाय सौ कुत्तों से भी ज्यादा श्रेष्ठ है अर्थात एक विपरीत स्वभाव का परम हितैषी व्यक्ति, उन सौ से श्रेष्ठ है जो आपकी चापलूसी करते हैं
  46. यदि माता दुष्ट है तो उसे त्याग देना चाहिए।
  47. यदि अपने स्वाम के हाथ में विष फ़ैल रहा हो तो उसे काट देना चाहिए।
  48. पडोसी राज्यों से सन्धियां तथा पारस्परिक व्यवहार का आदान-प्रदान और संबंध विच्छेद आदि का निर्वाह मंत्रिमंडल करता  है.
  49. हमेशा लोहे को लोहे से ही काटना चाहिए।
  50. संकट में केवल बूढी ही काम करती है.

चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को बहुत सारी बातें बताई है चाणक्य के विचार चन्द्रगुप्त को भी कठिन परिस्थितियों से निकाल ले गए तो हम आप क्या हैं| हम आप भी कुछ न कुछ कर सकते है| चाणक्य के अनमोल विचारों को चाणक्य की नीति को अपने जीवन में उतार कर.

ये थी चाणक्य की कही हुई बातें चाणक्य के अनमोल विचार और चाणक्य की नीति…! यदि आपको चाणक्य की नीति पढ़कर अच्छा लगा हो तो इस लेख को फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प आदि में शेयर करना न भूलें ”धन्यवाद”.

About the author

jyoti bharti

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम ज्योति भारती है मैंने हिंदी से (M.A) किया है मुझे कॉलेज के दिनों से ही हिंदी लिखने का बहुत शौक है.इसलिए मै किसी भी वेबसाइट के लिए हिंदी में शायरी, और बायोग्राफी के बारे में जानकारी शेयर करती हूँ

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